अभी हाल ही में बॉयस लॉकर रूम नाम से इंस्टाग्राम पर लड़कों का एक ग्रुप चर्चा में आया है। इस ग्रुप में नाबालिग और बालिग स्कूल के छात्र अपनी साथी लड़कियों के फोटो शेयर करके उसपर अश्लील टिप्पणियाँ करते थे। ये ग्रुप सामने आते ही पुलिस ने इन लड़कों पर कार्यवाही करनी शुरू कर दी है लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या एक ग्रुप पर कार्यवाही करने से ऐसी मानसिकता पर रोक लग जायेगी या क्या ऐसा सिर्फ लड़के ही करते हैं।
इस ग्रुप के सामने आने पर ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर चिंता और लड़कों की मानसिकता को लेकर कमेंट्स की बाढ़ आई हुई है। मगर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसे ग्रुप्स सिर्फ लड़कों के ही नहीं है बल्कि सोशल मीडिया पर लड़कियों के भी ऐसे ग्रुप्स की भरमार है, जिसपर वे भी लड़कों की न्यूड फोटोस और अश्लील बातें शेयर करती हैं। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि क्या एक जेन्डर को लेकर ही हमें सावधानी बरतने की ज़रूरत है या हमें इस बच्चों की सोच और झुकाव पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि किस ओर है।
यहां तो हम उनके माहौल को भी दोष नहीं दे सकते क्यूंकि सभी बहुत अच्छे घर से हैं और नामी स्कूल के स्टूडेंट्स हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सिर्फ अच्छा स्कूल या अच्छे कपड़े संस्कार नहीं सिखाते। इसके लिए ज़रूरी है बच्चों की बढ़ती उम्र में बढ़ती उलझनों को और रुचि को भांपते हुए उनसे खुलकर हर विषय पर बात करने की।
यहां कुछ स्क्रीनशॉट्स हैं, इसका एक उदाहरण कि ये दोनों जेन्डर्स में कॉमन है।
इसको लेकर कुछ युवाओं से भी उनकी भावनाएं जानने की कोशिश की गई कि वे इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं।
*आज के समय में किसी एक को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। हर कोई अपने मजे के लिए सब काम कर रहा है लेकिन हर चीज़ की एक लिमिट होनी चाहिए। इस तरह की चीज़ों में मां बाप की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये बहुत ज़रूरी है कि बच्चे को किस तरह का माहौल मिला है। - डॉ नेहा तोमर
*जैसे कि फिलहाल में हमारे सामने जो केस आया है वो बॉयस लॉकर रुम का है, जिसमें लड़के लड़कियों के ऊपर अभद्र टिप्पणी कर रहे थे, इसके बाद हम सभी सिर्फ एक जेन्डर के ऊपर निशाना साधने लगे लेकिन सच्चाई ये है कि ऐसा सिर्फ लड़के ही नहीं करते लड़कियाँ भी ऐसा कर रही हैं। वो भी फेक आईडी बनाकर लड़कों का यूस करती हैं। इसिलिए किसी एक को निशाना बनाने की बजाय हमें इस तरह की मानसिकता क्यूं हावी हो रही है इसपर ध्यान देना होगा। - रितिका यादव, स्टूडेंट
अभी हाल ही में मैंने न्यूज़ सुनी बॉयस लॉकर रूम को लेकर। सुनकर बड़ा अजीब लगा। आजकल सोशल मीडिया को लेकर हम काफी फ्रेंक हो गए हैं लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि हम जो भी शेयर कर रहे हैं वो कभी ना कभी वायरल हो सकता है और एक छोटा सा मजाक या अपने इंजॉयमेंट के लिये की गई हरकत किसी की जान भी ले सकती है। वहीं दुसरी ओर ऐसा भी नहीं है कि जो इस तरह के ग्रुप बने हुए हैं वो सारे लड़कों ने ही बनाये हैं बल्कि कई ग्रुप लड़कियों ने भी बना रखे हैं तो बात यहां किसी जेन्डर की नहीं बल्कि मानसिकता की है। हमें बच्चों को उनके बचपन से ही इन सब चीज़ों के बारे में समझाना चाहिए। - श्राद्ध, सेल्स मैनेजर
मैं ये तो नहीं कहूंगा कि ये मामला बहुत चौंकाने वाला है। बल्कि किसी के लिए भी ये कोई अचम्भे की बात नहीं है। लड़के लड़कियों के लिए या लड़कियां लड़कों को लेकर आपस में बातचीत करती ही हैं। मगर इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि आप की बातचीत आकर्षण की ओर है या ये किसी गलत दिशा में जा रही है। हर चीज़ की सीमा होनी ही चाहिए। अगर पेरेंटस बचपन से ही बच्चों से इस बारे में खुलकर बात करें तो शायद ऐसी मानसिकता बदल जाए। - शेखर चौधरी, इंजीनियर
इस ग्रुप के सामने आने पर ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर चिंता और लड़कों की मानसिकता को लेकर कमेंट्स की बाढ़ आई हुई है। मगर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसे ग्रुप्स सिर्फ लड़कों के ही नहीं है बल्कि सोशल मीडिया पर लड़कियों के भी ऐसे ग्रुप्स की भरमार है, जिसपर वे भी लड़कों की न्यूड फोटोस और अश्लील बातें शेयर करती हैं। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि क्या एक जेन्डर को लेकर ही हमें सावधानी बरतने की ज़रूरत है या हमें इस बच्चों की सोच और झुकाव पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि किस ओर है।
यहां तो हम उनके माहौल को भी दोष नहीं दे सकते क्यूंकि सभी बहुत अच्छे घर से हैं और नामी स्कूल के स्टूडेंट्स हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सिर्फ अच्छा स्कूल या अच्छे कपड़े संस्कार नहीं सिखाते। इसके लिए ज़रूरी है बच्चों की बढ़ती उम्र में बढ़ती उलझनों को और रुचि को भांपते हुए उनसे खुलकर हर विषय पर बात करने की।
यहां कुछ स्क्रीनशॉट्स हैं, इसका एक उदाहरण कि ये दोनों जेन्डर्स में कॉमन है।
इसको लेकर कुछ युवाओं से भी उनकी भावनाएं जानने की कोशिश की गई कि वे इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं।
*आज के समय में किसी एक को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। हर कोई अपने मजे के लिए सब काम कर रहा है लेकिन हर चीज़ की एक लिमिट होनी चाहिए। इस तरह की चीज़ों में मां बाप की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये बहुत ज़रूरी है कि बच्चे को किस तरह का माहौल मिला है। - डॉ नेहा तोमर
*जैसे कि फिलहाल में हमारे सामने जो केस आया है वो बॉयस लॉकर रुम का है, जिसमें लड़के लड़कियों के ऊपर अभद्र टिप्पणी कर रहे थे, इसके बाद हम सभी सिर्फ एक जेन्डर के ऊपर निशाना साधने लगे लेकिन सच्चाई ये है कि ऐसा सिर्फ लड़के ही नहीं करते लड़कियाँ भी ऐसा कर रही हैं। वो भी फेक आईडी बनाकर लड़कों का यूस करती हैं। इसिलिए किसी एक को निशाना बनाने की बजाय हमें इस तरह की मानसिकता क्यूं हावी हो रही है इसपर ध्यान देना होगा। - रितिका यादव, स्टूडेंट
अभी हाल ही में मैंने न्यूज़ सुनी बॉयस लॉकर रूम को लेकर। सुनकर बड़ा अजीब लगा। आजकल सोशल मीडिया को लेकर हम काफी फ्रेंक हो गए हैं लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि हम जो भी शेयर कर रहे हैं वो कभी ना कभी वायरल हो सकता है और एक छोटा सा मजाक या अपने इंजॉयमेंट के लिये की गई हरकत किसी की जान भी ले सकती है। वहीं दुसरी ओर ऐसा भी नहीं है कि जो इस तरह के ग्रुप बने हुए हैं वो सारे लड़कों ने ही बनाये हैं बल्कि कई ग्रुप लड़कियों ने भी बना रखे हैं तो बात यहां किसी जेन्डर की नहीं बल्कि मानसिकता की है। हमें बच्चों को उनके बचपन से ही इन सब चीज़ों के बारे में समझाना चाहिए। - श्राद्ध, सेल्स मैनेजर
मैं ये तो नहीं कहूंगा कि ये मामला बहुत चौंकाने वाला है। बल्कि किसी के लिए भी ये कोई अचम्भे की बात नहीं है। लड़के लड़कियों के लिए या लड़कियां लड़कों को लेकर आपस में बातचीत करती ही हैं। मगर इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि आप की बातचीत आकर्षण की ओर है या ये किसी गलत दिशा में जा रही है। हर चीज़ की सीमा होनी ही चाहिए। अगर पेरेंटस बचपन से ही बच्चों से इस बारे में खुलकर बात करें तो शायद ऐसी मानसिकता बदल जाए। - शेखर चौधरी, इंजीनियर


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